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राष्ट्रीय मतदाता दिवस


राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नए मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है, 25 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर निर्वाचन आयोग अस्तित्व में आया था। लेकिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर इतिहास को याद करने के बजाय हमें आगे की राह के बारे में तय करना होगा।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस

राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नए मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है, 7वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस 25 जनवरी 2018 को मनाया गया था।

कब से मनाया जाता है :

  1. भारत के निर्वाचन आयोग की स्थापना की याद में 2011 में इसकी शुरूआत की गई थी।
  2. 25 जनवरी 1950 को पहले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर निर्वाचन आयोग अस्तित्व में आया था। लेकिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर इतिहास को याद करने के बजाय हमें आगे की राह के बारे में तय करना होगा।
  3. इसके मनाए जाने के पीछे निर्वाचन आयोग का उद्देश्य था कि देश भर के सभी मतदान केंद्र वाले क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष उन सभी पात्र मतदाताओं की पहचान की जाएगी, जिनकी उम्र एक जनवरी को 18 वर्ष हो चुकी होगी। 

मतदान प्रतिशत कैसे बढ़ाएं

  • लेकिन मिशन अभी भी पूरा नहीं हुआ था।
  • पिछले दो दशकों में उत्साहजनक परिणाम नहीं प्राप्त हुए।
  • योग्य युवा मतदाताओं का मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की रफ्तार काफी ठंडी रही।
  • कुछ मामलों में तो यह करीब 20 से 25 प्रतिशत ही रहा।
  • मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना अनिवार्य नहीं सिर्फ स्वैच्छिक है जिसके कारण चुनाव आयोग सिर्फ लोगों को मतदान के लिए जागरूक ही कर सकता है। 
  • लेकिन चुनाव आयोग की प्राथमिकता स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है। यह अपने आप में एक लंबा और चुनौतीपूर्ण काम है।

क्या है मानसिकता

जबतक मतदाता चुनाव को एक कार्यक्रम के रूप में देखेगा तबतक यह आयोग के लिए एक लंबी प्रक्रिया ही बनी रहेगी।

चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग 

  • अधिसूचना जारी करने से लेकर परिणाम घोषित करने तक चुनाव की एक लंबी प्रक्रिया है। भारत जैसे विशाल एवं बड़ी आबादी वाले देश में चुनाव संपन्न कराना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। आयोग पर धन-बल और बाहु-बल से निपटने की भी जिम्मेदारी होती है।
  • मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए एक साफ-सुथरी एवं त्रुटि मुक्त मतदाता सूची तैयार करना (जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 11 और 62 के अनुसार) आयोग की प्राथमिकता में शामिल होता है।
  • मतदाताओं को लामबंद करने का काम चुनाव प्रचार कर विभिन्न राजनीतिक दलों पर छोड़ दिया गया था। सभी राजनीतिक दल स्वाभाविक रूप से मतदाताओं को लुभा कर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए अपने सबसे उत्तम प्रयास किया।
  • आयोग की भी एक दायित्व एवं लोकतंत्र के प्रति जिम्मेवारी बनती है कि वो मतदाताओं को जागरूक कर उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करे।

वोटिंग बढाने के लिए किसी प्रयास की आवश्यकता है या नहीं 

  • कुछ लोगों का यह मानना है कि साक्षरता में बढ़ोतरी होने से मतदान में स्वयं तेजी आ जायेगी। इस तरह की ढिलाई बरतने के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। पहले आम चुनाव (1951-52) में मतदान का प्रतिशत 51.15 था। इसे हम असंतोषजनक श्रेणी में नहीं रख सकते। उस समय साक्षरता करीब 17 प्रतिशत ही थी। हालांकि, जिस तरह से साक्षरता में वृद्धि हुई, उस अनुपात में मतदान में तेजी नहीं देखी गई है। 2009 के आम चुनाव में मतदान का प्रतिशत करीब 60 प्रतिशत ही रहा जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार साक्षरता दर 74 प्रतिशत थी।
  • 2009 के बाद आयोग ने मतदान बढ़ाने के लिए एक अलग तरह की भूमिका की रूपरेखा तैयार की। इसके लिए निर्वाचन आयोग के एक व्यापक या व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (SWEEP) नामक कार्यक्रम तैयार किया।
  • SWEEP के तहत निर्वाचन आयोग ने दो नारे तैयार किए पहला-‘ समावेशी और गुणात्मक भागीदारी ’ तथा दूसरा ‘ किसी भी मतदाता को नहीं छोड़ा जा सकता ’ ।
  • इसके अंतर्गत व्यक्तियों या संस्थाओं सहित सभी हितधारकों को लाया गया। इसके तहत मतदाता सूची में पंजीकरण एवं मतदान में भागीदारी के अंतर पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया।
  • इसमें लिंग, क्षेत्र, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य की स्थिति, शैक्षणिक स्तर, पेशेवर प्रवास, भाषा आदि पर भी विशेष रूप से ध्यान दिया गया।
  • सामाजिक बदलाव को ध्यान में रखते हुए मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए वृहत रूपरेखा तैयार की गई।
  • 'स्वीप’ प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक मतदाता ही मानता है। यहां तक कि अवयस्क लड़के एवं लड़कियों को भविष्य का मतदाता मानकर अभी से ही उसके अंदर मतदान के प्रति जागरूकता पैदा करने की जरूरत है, इसीलिए शिक्षा संस्थानों का भी उपयोग किया गया है।
65 प्रतिशत से थोड़ा कम मतदान भारत जैसे देश के लिए असाधारण नहीं हो सकता। फिर भी, राजनीतिक विश्लेषक इसे एक स्वस्थ प्रवृत्ति के रूप में नहीं देखते हैं। मतदान का उच्च प्रतिशत जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक माना जाता है। जबकि मतदान का निम्न प्रतिशत राजनीतिक उदासीन समाज की ओर इशारा करता है। ऐसी स्थिति का फायदा विघटनकारी तत्व उठाना चाहते हैं और लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करना चाहते हैं। इस प्रकार लोकतंत्र को अकेले एक भव्य विचार के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। यह लगातार मतपत्र में प्रतिबिंबित हो दिखाई पड़ते रहना चाहिए, यही लोकतंत्र की मजबूती है।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस: लोकतंत्र के लिए मजबूत प्रतिबद्धता

भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष २५ जनवरी को मनाया जाता है। विश्व में भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदान को लेकर कम होते रुझान को देखते हुए राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाने लगा था। इस सिलसिले में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जाएंगे और उन्हें निर्वाचन फोटो पहचान पत्र सौंपे जाएंगे। पहचान पत्र बांटने का काम सामाजिक, शैक्षणिक व गैर-राजनीतिक व्यक्त‌ि करेंगे। इस मौके पर मतदाताओं को एक बैज भी दिया जाएगा, जिसमें लोगो के साथ नारा अंकित होगा 'मतदाता बनने पर गर्व है, मतदान को तैयार हैं।'

वर्ष 1950 से स्थापित चुनाव आयोग के 61वें स्‍थापना वर्ष पर 25 जनवरी 2011 को तत्कालीन राष्ट्रपत‌ि प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ का शुभारंभ किया था। इस आयोजन के दो प्रमुख विषय थे, ‘समावेशी और गुणात्मक भागीदारी’ (Inclusive and Qualitative Participation) तथा ‘कोई मतदाता पीछे न छूटे’

भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए अहम है। इस दिन भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र के प्रत्येक चुनाव में भागीदारी की शपथ लेनी चाहिए, क्योंकि भारत के प्रत्येक व्यक्ति का वोट ही देश के भावी भविष्य की नींव रखता है। इसलिए हर एक व्यक्ति का वोट राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनता है।

25 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है 'नैशनल वोटर्स डे'

गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले यानी 25 जनवरी को नैशनल वोटर्स डे या राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य युवाओं को वोट देने के लिए प्रेरित करना है। शॉर्ट में कहा जाए तो वोट देने के अधिकार को सेलिब्रेट करने का दिन है राष्ट्रीय मतदाता दिवस। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी इसलिए इसी दिन को राष्ट्रीय मतदाता दिवस घोषित किया गया है। इस दिन उन युवाओं के लिए मतदाना जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं, जिन्हें इसी वर्ष वोट देने का अधिकार मिला है।

भारत में जितने भी चुनाव होते हैं, उनको निष्पक्षता से संपन्न कराने की जिम्मेदारी 'भारत निर्वाचन आयोग' की होती है। 'भारत निर्वाचन आयोग' का गठन भारतीय संविधान के लागू होने से 1 दिन पहले 25 जनवरी 1950 को हुआ था, क्योंकि 26 जनवरी 1950 को भारत एक गणतांत्रिक देश बनने वाला था और भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग का गठन जरूरी था इसलिए 25 जनवरी 1950 को 'भारत निर्वाचन आयोग' गठन हुआ।

युवाओं की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी 

भारत देश की 65 प्रतिशत आबादी युवाओं की है इसलिए देश के प्रत्येक चुनाव में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा भागीदारी करनी चाहिए और ऐसी सरकारें चुननी चाहिए, जो कि सांप्रदायिकता और जातिवाद से ऊपर उठकर देश के विकास के बारे में सोचें। जिस दिन देश का युवा जाग जाएगा, उस दिन देश से जातिवाद, ऊंच-नीच, सांप्रदायिक भेदभाव खत्म हो जाएगा। ये सिर्फ और सिर्फ हो सकता है हम सबके मतदान करने से।

‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाने का दिन

भारत सरकार ने वर्ष 2011 से हर चुनाव में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस '25 जनवरी' को ही 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की थी और 2011 से ही हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। इस दिन देश में सरकारों और अनेक सामजिक संथाओं द्वारा लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिससे कि देश की राजनीतिक प्रक्रियाओं में लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस का हर वर्ष आयोजन सभी भारत के नागरिकों को अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाता है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस का आयोजन लोगों को यह भी बताता है कि हर व्यक्ति के लिए मतदान करना जरूरी है। भारत के प्रत्येक नागरिक का मतदान प्रक्रिया में भागीदारी जरूरी है, क्योंकि आम आदमी का एक वोट ही सरकारें बदल देता है। हम सबका एक वोट ही पलभर में एक अच्छा प्रतिनिधि भी चुन सकता है और एक बेकार प्रतिनिधि भी चुन सकता है इसलिए भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने मत का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसी सरकारें या प्रतिनिधि चुनने के लिए करना चाहिए, जो कि देश को विकास और तरक्की के पथ पर ले जा सकें।

25 जनवरी को भारत के प्रत्येक नागरिक को लोकतंत्र में विश्वास रखते हुए शपथ लेनी चाहिए कि वे देश की स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने की लोकतांत्रिक परंपरा को बरकरार रखेंगे और प्रत्येक चुनाव में धर्म, नस्ल, जाति, समुदाय, भाषा आधार पर प्रभावित हुए बिना निर्भीक होकर मतदान करेंगे। ऐसी शपथें हर वर्ष 25 जनवरी को लाखों लोग लेते हैं।

अपराधी प्रवृत्ति

लेकिन फिर भी इस शपथ पर अमल बहुत कम होता है, क्योंकि आज भी लोग सांप्रदायिक, जातिवाद और भाषायी आधार पर वोट देते हैं। इससे अनेक अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी देश की संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधि चुनकर चले जाते हैं। इसलिए भारत के प्रत्येक नागरिक को सांप्रदायिक और जातीय आधार से ऊपर उठकर एक साफ-सुथरी छवि के व्यक्ति के लिए अपने मत का प्रयोग करना चाहिए।

उद्देश्य

'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' का उद्देश्य लोगों की मतदान में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ-साथ मतदाताओं को एक अच्छा साफ-सुथरी छवि का प्रतिनिधि चुनने हेतु मतदान के लिए जागरूक करना है। हमारे लोकतंत्र को विश्व में इतना मजबूत बनाने के लिए मतदाताओं के साथ-साथ भारत देश के निर्वाचन आयोग का भी अहम् योगदान है। हमारे निर्वाचन आयोग की वजह से ही देश में निष्पक्ष चुनाव हो पाते हैं।
आज 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के दिन देश के प्रत्येक मतदाता को अपनी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।