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विश्व स्वास्थ्य दिवस


हम हमेशा कहते हैं कि “स्वास्थ्य ही धन है”। विश्व की कम से कम आधी आबादी को अभी भी सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्राप्त नहीं है। स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में भुगतान करने के कारण लगभग सौ मिलियन से अधिक लोग "अत्यधिक गरीबी" रेखा के नीचे चले जाते है। 1948 में 7 अप्रैल को ही डब्ल्यू.एच.ओ. की स्थापना हुई थी। उसी साल डब्ल्यू.एच.ओ. की पहली विश्व स्वास्थ्य सभा हुई, जिसमें 7 अप्रैल से हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का फैसला लिया गया।

विश्व स्वास्थ्य दिवस : ७ अप्रैल

विश्व स्वास्थ्य दिवस (अंग्रेज़ी: World Health Day) विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation or WHO) के तत्वावधान में हर साल इसके स्थापना दिवस पर 7 अप्रैल को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इसका मक़सद दुनिया भर में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) विश्व के देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करने की संस्था है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के १९३ सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य हैं। यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अनुषांगिक इकाई है। इस संस्था की स्थापना ७ अप्रैल १९४८ को की गयी थी। इसी लिए प्रत्येक साल ७ अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। भारत भी विश्व स्वास्थ्‍य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है।

  1. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की स्‍थापना 7 अप्रैल, 1948 को हुई थी
  2. इसका मुख्‍यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में है
  3. भारत भी विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का एक सदस्‍य देश है जिसका मुख्‍यालय भारत की राजधानी दिल्‍ली (Delhi) में स्थित है
  4. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के 194 सदस्‍य हैं
  5. विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने अब तक दस प्रमुख जानलेवा बीमारियों की पहचान की है
  6. जिनमें कैंसर, सेरिब्रोवैस्क्यूलर डिजीज, एक्यूट लोअर रेस्पायरेटरी इन्फेक्शन, पेरीनेटल कंडीशंस, टी.बी., कारोनरी हार्ट डिजीज, क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, अतिसार, डेसेन्टरी तथा एड्स या एचआईवी शामिल हैं
  7. प्रत्‍येक वर्ष 7 अप्रैल के दिन को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है.

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2018 की थीम और स्लोगन

हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्वभर में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्या से संबंधित एक थीम (विषय) का निर्धारण करता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस ने वर्ष 2018 की थीम यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज निर्धारित की है और इस साल हर कोई, सभी जगह “सभी स्वस्थ्य रहे” नामक स्लोगन (नारा) का अनुगमन करेगा। इस थीम के द्वारा डब्लूएचओ यह सुनिश्चित करेगा कि हर कोई, सभी जगह किसी भी वित्तीय संकट का सामना किए बिना, सभी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकता है।सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का मतलब है, कि सभी लोगों और समुदायों को वित्तीय कठिनाइयों एवं भेदभाव के बिना तथा किसी को भी पीछे न छोड़ते हुए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों। इसमें आवश्यक, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का मिश्रण है, जिसमें स्वास्थ्य प्रोत्साहन से लेकर रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और उपशामक देखभाल शामिल हैं। सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली (यूएचसी) हर किसी को कब और कहाँ? वित्तीय कठिनाई का सामना किए बिना, उन सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त कराता है, जिनकी उन्हें ज़रूरत है।

तथ्य:

  • विश्व की कम से कम आधी आबादी को अभी भी सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्राप्त नहीं है।
  • स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में भुगतान करने के कारण लगभग सौ मिलियन से अधिक लोग "अत्यधिक गरीबी" रेखा के नीचे चले जाते है।
  • स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के लिए आठ सौ मिलियन से अधिक लोग (विश्व की लगभग बारह प्रतिशत जनसंख्या) अपने घर के बजट का कम से कम दस प्रतिशत का भुगतान करते हैं।
  • रिपोर्ट दर्शाती है, कि कुछ सेवाओं जैसे कि टीकाकरण, परिवार नियोजन, एचआईवी के लिए एंटीरिट्रोवाइरल उपचार और मलेरिया की रोकथाम में सुधार हुआ है; हालांकि प्रगति असमान है।

इतिहास

विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत 1950 से हुई। इससे पहले 1948 में 7 अप्रैल को ही डब्ल्यू.एच.ओ. की स्थापना हुई थी। उसी साल डब्ल्यू.एच.ओ. की पहली विश्व स्वास्थ्य सभा हुई, जिसमें 7 अप्रैल से हर साल विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने का फैसला लिया गया।

112 करोड़ लोग इस देश में रहते हैं और 112 करोड़ लोगो में स्वस्थ्य लोगो की संख्या गिनती के 25 से 30 करोड़ हैं बस. 25 से 30 करोड़ लोग ऐसे हैं इस देश में जिनको स्वस्थ्य कहा जा सकता हैं. बाकी जितने भी लोग हैं सभी को कुछ न कुछ तकलीफे हैं की 5 करोड़ लोग इस देश में हैं जिनको diabetes हैं और विशेषज्ञ ये कहते हैं UNESCO की report में की अगर यही गति और रफ़्तार से diabetes बढती गयी तो कुछ सालो में लगभग 10 से 12 करोड़ लोगो को ये होगी फिर इसी रिपोर्ट में उन्होंने कहा हैं की 12 से 13 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें lungs infection की भिन्न भिन्न बीमरियां हैं जैसे दमा हैं, अस्थमा हैं, सांस फूलती हैं, tuberculosis हैं. ऐसे बारह तेरह करोड़ लोग हैं

फिर उसी report में यह बात भी सामने आई हैं की भारत में 15 से 16 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनको घुटनों का दर्द हैं, कमर का दर्द हैं, कंधे का दर्द हैं, झाद्दियो का दर्द हैं जिसको आप संधिवाद कहते हैं आम भाषा में.

ये जोड़ो के दर्द की बीमारियाँ हैं और 9 से 10 करोड़ लोग ऐसे हैं जिनको पेट की कुछ न कुछ तकलीफ रहती हैं जिनको पित्त की बीमारियों के द्वारा हम अक्सर परिभाषित करते हैं जैसे gas बनना, acidity होना, अल्सर होना. hyper acidity होना वगेरा वगेरा.

और UNESO की एक report में लिखा हुआ था जो की वाकई में बहुत परेशान करने वाली बात हैं की 20 से 22 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें आँखों की कुछ न कुछ परेशानी हैं ही जैसे या तो कम दीखता है, या बिलकुल नहीं दीखता, या रात में नहीं दीखता, दिन में दीखता भी हैं तो रंग का अंतर नहीं पता चल पाता. हम लोग अंग्रेजी में उनको nightblindness या colour blindness कहते हैं

इस report पर भारत सरकार कहती हैं की विभिन्न बीमारियों का इलाज़ करने के लिए इस देश में जो डॉक्टरो की संख्या हैं जो registered हैं वो 23 लाख हैं. MBBS, MDMS, BAMS माने आयुर्वेद के और प्लस BHMS होम्योपेथी के. तीनो विधाओ के अब 23 लाख डॉक्टर और लगभग 70 से 75 करोड़ मरीज़ या बल्कि 80 करोड़ मरीज़ अभी हाल ही में हैं . भारत की सरकार और राज्य की सरकारों ने अब तक जितने डॉक्टरस बनाए हैं इनको बनाने में करीब 10 लाख करोड़ से ज्यादा का खर्च हो चूका हैं

इन रिपोर्टो द्वारा यदि अभी भी हमारी आँख नहीं खुलती हैं तो ना जाने किस चमत्कार का हमे और इंतज़ार करना पड़ेगा की जल्द ही इस देश का बच्चा बच्चा स्वस्थ हो सके. इस कारण चमत्कार के भरोसे बैठने से अच्छा हैं की अगर हम अभी से खुद को अपने पूर्वजो द्वारा दी गयी योग की संस्कृति का निर्वाह करे. ताकि हम स्वस्थ हो सके. यदि एक एक व्यक्ति इस सन्देश से प्रभावित होकर योग कर के एवं सही भोजन ग्रहण करके खुद को स्वस्थ बनाता हैं तो हमारी सरकार का बहुत सा पैसा बच जाएगा जो की हमारे ही विकास मे भविष्य में लगेगा. हमे इस बात को जल्द से जल्द समझना होगा अन्यथा बहुत देर हो जाएगी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका

सन 1948 में 7 अप्रैल के दिन संयुक्त राष्ट्र संघ की एक अन्य सहयोगी और संबद्ध संस्था के रूप में दुनिया के 193 देशों ने मिल कर स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नींव रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाना है। हर इंसान का स्वास्थ्य अच्छा हो और बीमार होने पर हर व्यक्ति को अच्छे प्रकार के इलाज की अच्छी सुविधा मिल सके। दुनिया भर में पोलियो, रक्ताल्पता, नेत्रहीनता, कुष्ठ, टी.बी., मलेरिया और एड्स जैसी भयानक बीमारियों की रोकथाम हो सके और मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा मिल सके, और इन समाज को बीमारियों के प्रति जागरूक बनाया जाए और उनको स्वस्थ वातावरण बना कर स्वस्थ रहना सिखाया जाए। 

हर साल, यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित एक थीम का आयोजन करता है। जिसमें पोलियो, अवसाद (डिप्रेशन), कुष्ठ रोग और चिकनपॉक्स (छोटी चेचक) आदि जैसे स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे शामिल होते हैं। डब्ल्यूएचओ विभिन्न बीमारियों और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इस दुनिया को स्वस्थ बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्ण स्वस्थ होना ही मानव-स्वास्थ्य की परिभाषा है। 

भारत में स्वास्थ्य आंकड़े

भारत ने पिछले कुछ सालों में तेजी के साथ आर्थिक विकास किया है लेकिन इस विकास के बावजूद बड़ी संख्या में लोग कुपोषण के शिकार हैं जो भारत के स्वास्थ्य परिदृश्य के प्रति चिंता उत्पन्न करता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार तीन वर्ष की अवस्था वाले 3.88 प्रतिशत बच्चों का विकास अपनी उम्र के हिसाब से नहीं हो सका है और 46 प्रतिशत बच्चे अपनी अवस्था की तुलना में कम वजन के हैं जबकि 79.2 प्रतिशत बच्चे एनीमिया (रक्ताल्पता) से पीड़ित हैं। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया 50 से 58 प्रतिशत बढ़ा है।

कहा जाता है बेहतर स्वास्थ्य से आयु बढ़ती है। इस स्तर पर देखें तो बांग्लादेश भारत से आगे है। भारत में औसत आयु जहां 64.6 वर्ष मानी गई है वहीं बांग्लादेश में यह 66.9 वर्ष है। इसके अलावा भारत में कम वजन वाले बच्चों का अनुपात 43.5 प्रतिशत है और प्रजनन क्षमता की दर 2.7 प्रतिशत है। जबकि पांच वर्षों से कम अवस्था वाले बच्चों की मृत्यु दर 66 है और शिशु मृत्यु दर जन्म लेने वाले प्रति हज़ार बच्चों में 41 है। जबकि 66 प्रतिशत बच्चों को डी.पी.टी. का टीका देना पड़ता है।

इंडिया हेल्थ रिपोर्ट 2010 के मुताबिक सार्वजनिक स्वास्थ्य की सेवाएं अभी भी पूरी तरह से मुफ़्त नहीं हैं और जो हैं उनकी हालत अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की काफ़ी कमी है। भारत में डॉक्टर और आबादी का अनुपात भी संतोषजनक नहीं है। 1000 लोगों पर एक डॉक्टर भी नहीं है। अस्पतालों में बिस्तर की उपलब्धता भी काफ़ी कम है। केवल 28 प्रतिशत लोग ही बेहतर साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं।
पिछले कुछ सालों में यहां एच.आई.वी. एड्स तथा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रभाव बढ़ा है। साथ ही डायबिटीज, हृदय रोग, क्षय रोग, मोटापा, तनाव की चपेट में भी लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं। महिलाओं में स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर का ख़तरा बढ़ा है। ये बीमारियां बड़ी तादाद में उनकी मौत का कारण बन रही हैं।

ग्रामीण तबके में देश की अधिकतर आबादी उचित खानपान के अभाव में कुपोषण की शिकार है। महिलाओं, बच्चों में कुपोषण का स्तर अधिक देखा गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति 10 में से सात बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं, महिलाओं की 36 प्रतिशत आबादी कुपोषण की शिकार है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2018 का महत्व

हम हमेशा कहते हैं कि “स्वास्थ्य ही धन है”। यह कहावत हमारे जीवन में स्वास्थ्य के महत्व को दर्शाती है। लेकिन हम वास्तव में इस स्वास्थ्य नामक धन पर कितना ध्यान आकर्षित कर पाते हैं। एक खुशहाल जीवन जीने के लिए, एक व्यक्ति का स्वस्थ सेहतमंद होना आवश्यक  है। हमारे उन्मत्त आधार से बाध्य जीवन में, अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना काफी मुश्किल होता है। मनुष्य के जीवन की गुणवत्ता दिन प्रति दिन खराब हो रही है। यह उन संगठनों के लिए एक गंभीर मुद्दा बन गया है, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उन्मूलन में लगे हुए हैं।

इस 70वें विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), वैश्विक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह दिन दुनिया भर के लोगों में स्वस्थ रहने की आदतों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अंतिम लक्ष्य, लोगों को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थितियों से अवगत कराना है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2018 पर स्वास्थ्य जागरूकता पहल

इस दिन पर, सरकारी, गैर-सरकारी, गैर सरकारी संगठन और अन्य स्वास्थ्य संगठन सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों का आयोजन करते हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर मीडिया लोगों की बातें और उद्धरण प्रकाशित करता है। इस दिन फेसबुक और ट्विटर इत्यादि जैसी सोशल मीडिया वेबसाइटों पर काफी सुर्खियाँ, स्लोगन, संदेश और ब्लाग प्रकाशित होते हैं।

स्वास्थ्य के महत्व के बारे में छात्रों को जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सेमिनारों में, तर्क-वितर्क, नुक्कड़ नाटकों, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। सरकारी और गैर सरकारी संगठन जहाँ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहाँ निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविरों का आयोजन किया जाता है।

सभी देशों के स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने नागरिकों के लिए, अपने देश को एक स्वस्थ बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए। पूरे विश्व के संयुक्त प्रयासों के बिना, ऐसा करना संभव नहीं है, क्योंकि केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस दुनिया को जीने योग्य एक जगह बनाने के अपने उद्देश्य को आसानी से पूरा नहीं कर सकता है।