0522-4300890 | info@myfestival.online

Karva Chauth



करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत शिवजी के लिए रखा था। इसके बाद ही उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। महाभारत में पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी द्वारा भी इस व्रत को रखा गया था।इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है।

करवा चौथ

करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान का पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब ४ बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता है।
Karva Chauth in India 
27 अक्टूबर 2018 शनिवार 

ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी नारियाँ करवाचौथ का व्रत बडी़ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ रखती हैं। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती  (सुहागिन) स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है।  

कैसे हुई शुरुआत

सबसे पहले माता पार्वती ने यह व्रत शिवजी के लिए रखा था। इसके बाद ही उन्हें अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था। इसलिए इस व्रत में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा की जाती है। महाभारत में पांडवों की विजय के लिए द्रौपदी द्वारा भी इस व्रत को रखा गया था। 

एक बार देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ और देवताओं की हार होने लगी। इसके बाद भगवान ब्रह्मा ने कहा सभी देवताओं की पत्नियों को अपने पतियों के लिए व्रत रखने को कहा था। फिर कार्तिक माह में चतुर्थी के दिन सभी देवताओं की पत्नियों ने व्रत रखा और पतियों की विजय की कामना की। उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और युद्ध में देवताओं की विजय हुई।

भारत देश में वैसे तो चौथ माता जी मंदिर स्थित है, लेकिन सबसे प्राचीन एवं सबसे अधिक ख्याति प्राप्त मंदिर राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गाँव में स्थित है। चौथ माता के नाम पर इस गाँव का नाम बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा पड़ गया। चौथ माता मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी।

व्रत की विधि

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें।  

पूजन 

उस दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें।

नैवेद्य

शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य हेतु बनाएँ।

करवा

काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे अथवा तांबे के बने हुए करवे।

पूजन विधि

बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।
आइए जानें, करवाचौथ के व्रत और पूजन की उत्तम विधि के बारे जिसे करने से आपको इस व्रत का 100 गुना फल मिलेगा...
  • सूर्योदय से पहले स्नान कर के व्रत रखने का संकल्पत लें.
  • फिर मिठाई, फल, सेंवई और पूड़ी वगैरह ग्रहण करके व्रत शुरू करें.
  • फिर संपूर्ण शिव परिवार और श्रीकृष्ण की स्थापना करें.
  • गणेश जी को पीले फूलों की माला , लड्डू और केले चढ़ाएं.
  • भगवान शिव और पार्वती को बेलपत्र और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें.
  • श्री कृष्ण को माखन-मिश्री और पेड़े का भोग लगाएं.
  • उनके सामने मोगरा या चन्दन की अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएं.
  • मिटटी के कर्वे पर रोली से स्वस्तिक बनाएं.
  • कर्वे में दूध, जल और गुलाबजल मिलाकर रखें और रात को छलनी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें.
  • इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार जरूर करें, इससे सौंदर्य बढ़ता है.
  • इस दिन करवा चौथ की कथा कहनी या फिर सुननी चाहिए.
  • पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें - 'ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें।
  • कथा सुनने के बाद अपने घर के सभी बड़ों का चरण स्पर्श करना चाहिए.
  • फिर पति के पैरों को छूते हुए उनका आशीर्वाद लें .
  • पति को प्रसाद देकर भोजन कराएं और बाद में खुद भी भोजन करें.

सोलह श्रृंगार का महत्त्व

हिन्दू महिलाओं के सोलह श्रृंगार का रिश्ता उनके सुहाग से होता है। सोलह श्रृंगार उनके सुहाग को लंबी उम्र के साथ साथ उनके घर परिवार की खुशियों को बरकरार रखने में मदद करता है।
करवा चौथ का पर्व महिलाओं के साज श्रृंगर के लिए भी जाना जाता है। महिलाएं इस दिन ठीक वैसे ही तैयार होती हैं जैसा की शादी के दिन।
  • 1 मांग टीका- यह पति द्वारा दिए गए सिंदूर का रक्षक होता है
  • 2 बिंदिया- इसे इस तरह लगाया जाता है की मांगटीका का एक चोर इसे स्पर्श करे
  • 3 काजल-काजल असुभ नज़रों से बचाव करता है
  • 4 नथुनी- नाक में पहना जाने वाला यह आभूषण रस्म और रिवाज़ में बेहद महत्वपूर्ण होता है
  • 5 मंगलसूत्र- यह सुबह का सूचक है जिसके बिना हर शादी अधूरी है
  • 6 कर्णफूल- कर्णफूल को ईयर रिंग कहते हैं।
  • 7 मेहंदी- श्रृंगार में आठवें नंबर पर है मेहंदी
  • 8 कंगना- इनके बिना श्रृंगार अधूरा माना जाता है
  • 9 गजरा - बालों में गजरा लगाने का महत्त्व है की दुल्हन वही अच्छी मानी जाती है जिसके बाल पूरी तरह से व्यवस्थित होते हैं
  • 10 बाजूबंद- हड्डियों के दर्द को रोकता है और नसों के खिंचाव से बचाता है
  • 11 अंगूठी-अंगूठी भी एक सुहाग की निशानी मानी गई है जो अनामिका में पहनी जाती है
  • 12 कमरबंद- कमरबंद को तगड़ी भी कहते हैं, इसे पहनने से काम में उत्साह बना रहता है शरीर में स्फूर्ति रहती है
  • 13 पायल- पायल के घुंगरू  बजते हैं जो घर के लिए शुभ होते हैं
  • 14 बिछिया- बिछिया दोनों पांव की तीन उँगलियों में पहनी जाती है
  • 15 परिधान-महिलाओं को अपने शारीरिक आकर और प्रकृति के अनुसार परिधान पहनने चाहिए
  • 16 इत्र- इत्र लगाने से आपके आस पास अच्छी ऊर्जा का संचालन होता 

करवा चौथ व्रत कथा

एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा। उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगर को बाँधकर यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से कहने लगी- हे भगवन! मगर ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगर को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ।
यमराज बोले- अभी मगर की आयु शेष है, अतः मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली, अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगर को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।

Related Post