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Teej



तीज का पर्व महिलाओं के लिए बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है। शादी को एक बहुत ही पवित्र और पावन रिश्ता माना जाता है। इसी कारणवश कई रस्में ऐसी हैं, जो शादी-शुदा लोगों के लिए होती है, जो उनके रिश्ते को मजबूती प्रदान करती है।

तीज के त्यौहार

हमारा देश परंपराओं का देश है , रिश्तों का देश है , रीती रिवाज़ों का देश है। हमारे यहाँ कई ऐसे छोटे-छोटे त्यौहार मनाये जाते हैं , जो अलग अलग रिश्तों से जुडी हुई है। उसमे तीज के त्यौहार का अपना एक अलग ही रंग है। हमारे यह चार प्रकार की तीज मनाई जाती है: अखा तीज , हरतालिका तीज , हरियाली तीज , और कजरी तीज।

तीज का पर्व महिलाओं के लिए बहुत ज़्यादा ही महत्वपूर्ण होता है। हमारे यहाँ शादी को एक बहुत ही पवित्र और पावन रिश्ता माना जाता है। इसी कारणवश कई रस्में ऐसी हैं, जो शादी-शुदा लोगों के लिए होती है, जो उनके रिश्ते को मजबूती प्रदान करती है।

तीज पर एक प्रचलित कथा 

एक साहूकार के सात बेटे थे. सतुदी तीज के दिन उसकी बड़ी बहू नीम के पेड़ की पूजा कर रही थी कि तभी उसके पति का देहांत हो गया. इसी तरह से एक-एक करके साहूकार के 6 बेटे गुजर गए. फिर सातवें बेटे की शादी होती है तो साहूकार और उसकी पत्नी बहुत डरे हुए रहते हैं. तीज के दिन नई बहू कहती है कि वो नीम के पेड़ की जगह उसकी टहनी तोड़कर उसकी पूजा करेगी. उसके पूजा करने के दौरान ही मृत बेटे लौट आते हैं लेकिन वे किसी को दिखाई नहीं देते. बस नई बहू ही ये बात देख पाती है. वो तुरंत अपनी जेठानियों से चिल्लाकर कहती है कि वे आएं और साथ मिलकर पूजा करें. जेठानियां कहती हैं कि वे ऐसा कैसे कर सकती हैं, जबकि उनके पति नहीं रहे. तब वे सभी साथ आकर पूजा करती हैं और उनके पति सामने प्रकट हो जाते हैं. तभी से इस दिन नीम की टहनी की पूजा की जाने लगी ताकि पति की लंबी उम्र बनी रहे.

हरियाली तीज

उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई शहरों में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है. हरियाली तीज भारत में मनाये जाने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है जो सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को मनाया जाता है। इस पर्व को मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। सावन का सुहावना मौसम और बारिश की ठंडी-ठंडी बूंदे सभी का मन मोह लेती है
श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज पर्व के रूप में मनाया जाता है. इसे हरियाली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सावन के महीने में आता है. महिलाएं इस दिन मां पार्वती और भगवान शंकर की पूजा करती हैं और अपने पति के लंबी आयु की कामना करती हैं. इस बार हरियाली तीज 13 अगस्त को मनाई जाएगी.

हरियाली तीज का मुहूर्त:

  • साल 2018 में हरियाली तीज 13th अगस्त 2018, सोमवार के दिन मनाई जाएगी. 
  • सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि यानी कि 13 अगस्त 2018, सोमवार सुबह 08:36 से इसका मुहूर्त शुरू होगा. 
  • इसका समापन 14 अगस्त 2018, मंगलवार को सुबह 05:45 पर हो जाएगा.

हरियाली तीज व्रत :

तीज के पावन पर्व को विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है। इस दिन सुहागन स्त्रियों के मायके से श्रृंगार की वस्तुएं और मिठाइयां उसके ससुराल भेजी जाती है। व्रत वाले दिन महिलाएं सुबह जल्दी जागकर स्नान आदि करके सोलह श्रृंगार करती है और पुरे दिन निर्जला व्रत रखती है। 
सोलह श्रृंगार आदि करने के बाद पूजा की विधि के अनुसार देवी पार्वती और भगवान शंकर का पूजन किया जाता है। पूजा के अंतिम चरण में तीज की कथा सुनाई जाती है। जिसके पूर्ण होने के बाद महिलाएं अपने घर में उत्सव मनाती है। इस दिन झूला झूलने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है इस दिन विवाहिता स्त्री को अपने मायके से आए कपडे और श्रृंगार का ही प्रयोग करना चाहिए। अच्छे वर की मनोकामना के लिए कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को रखती है।

हरियाली तीज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को, नाग पंचमी से ठीक 2 दिन पहले मनाई जाती है। हरियाली तीज को छोटी तीज और श्रावण तीज भी कहा जाता है। हरियाली तीज के 15 दिन बाद आने वाली कजरी तीज को बड़ी तीज के नाम से जाना जाता है।

हरियाली तीज का महत्व एवं पूजन विधि

  • हरियाली तीज को श्रावणी या सावन की तीज ( sawan ki teej ) भी कहते है। सावन का महीने में शिवजी की पूजा  का बहुत महत्त्व होता है। हरियाली Teej भी शिवजी और माता पार्वती को समर्पित होती है।
  • महादेव शिवजी और देवी पार्वती का पुनर्मिलन Hariyali Teej मनाने का विशेष कारण है। देवी पार्वती ने महादेव को पाने के लिए बहुत जन्मों तक कठोर तप किया था। इस Teej  के दिन महादेव ने देवी पार्वती को अपनाकर पत्नी के रूप में स्वीकार  किया था।तीज महिलाएं इस दिन व्रत या उपवास ( Fast ) रखती है। देवी पार्वती की पूजा करके आशीर्वाद लेती है और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए मंगल कामना करती है। देवी पार्वती को तीज माता के नाम से पुकारा जाता है। कुआंरी लड़कियां शिवजी जैसे वर की कामना में ये व्रत ( Fast ) और पूजा करती हैं।
  • इस दिन महिलाएं लहरिया के डिज़ाइन वाले रंग बिरंगे वस्त्र पहनती है जिसमे पीले , हरे , लाल ,नीले , गुलाबी आदि चटक रंगों का समावेश होता है। जिसे देखकर आसानी से महिलाओं के उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • नवविवाहित कन्या को इस  Teej  पर माता पिता और सास ससुर की और से कई प्रकार के तोहफे ( Gifts ) दिए जाते है। नए कपड़े , जेवर , चूड़ियां , पायल , बिंदी , मेहंदी , फल ,  मिठाई आदि दिए जाते है।
  • राजस्थान में Teej का त्यौहार बड़े उमंग के साथ मनाया जाता है। राजस्थान में Teej  पर सबसे खास स्वादिष्ट मिठाई घेवर का आनंद उठाया जाता है। । सास इस दिन नई बहु को कई प्रकार के तोहफे देती हैं जिसमे घेवर और जेवर अवश्य शामिल होते है।
  • इस गिफ्ट को सिंजारा कहते है। इसलिए इस Teej को सिंजारा तीज Sinjara teej के नाम से भी जानते है। महिलाएं मेहंदी के विभिन्न डिज़ाइन से हाथों और पैरों को सजाती है। खूब मौज मस्ती करती है। बगीचों में पेड़ों पर बड़े बड़े झूलों पर झूला झूलती है।
  • राजस्थान में जयपुर में इस दिन Teej Mata की पारंपरिक और शाही सवारी गाजे बाजे के साथ निकाली जाती है। ये सवारी जनानी ड्योडी से रवाना होकर छोटी चौपड़ , गणगौरी बाजार , चौगान स्टेडियम होती हुई तालकटोरा पहुंचती है। दूसरे दिन भी इसी तरह से शाही सवारी निकाली जाती है। 
  • जयपुर के आराध्य देव गोविन्ददेव जी को Teej पर विशेष लहरिया वस्त्र से सजाया जाता है। जयपुर का Teej  का त्यौहार पूरे विश्व में मशहूर है। हजारों की संख्या में लोग इस उत्सव को देखने के लिए इकट्ठे होते है।

कजरी तीज

बता दें कि हरियाली तीज श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को नाग पंचमी के 2 दिन पहले मनाई जाती है. इसे छोटी तीज या श्रावण तीज भी कहते हैं. इसके 15 दिनों बाद एक और तीज होती है, कजरी तीज. 

काजारी तीज 29 अगस्त 2018 को मनायी जायेगी।

हरियाली तीज की तरह कजरी तीज भी सुहागिनों का पर्व है. हिंदू शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए ये व्रत करती हैं. शादी की इच्छुक लड़कियां मनपसंद जीवनसाथी के लिए व्रत तथा पूजा करती हैं.

क्यों पड़ा कजरी तीज नाम

पौराणिक मान्यता के अनुसार देवी पार्वती ने शिव से विवाह के लिए कठिन तपस्या की. ये तप 108 सालों तक चला और शिव ने इसी दिन पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकारा था. इसी दिन को कजरी तीज कहते और भगवान शिव की रजामंदी का उत्सव मनाते हैं.
कजरी तीज , कजली तीज या बड़ी तीज इसे किसी भी नाम से बुलाया जा सकता है। यह तीज भी सुहागनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । वो इसे अपने जीवन साथी की लंबी उम्र के लिए रखती है। कुँवारी लड़कियाँ अपना मनचाहा वर पाने के लिए।
हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से पाचवे महीने यानि भादो में कृष्ण पक्ष की तीज को कजरी तीज मनाई जाती है।

कहते है, कि जब माँ पार्वती शिव जी को अपने वर के रूप में चाहती थी, तो शिवजी ने उनके सामने शर्त रखी, कि वो अपनी भक्ति और प्यार का प्रमाण दें। माँ पार्वती ने 108 वर्ष तक कठोर तपस्या की, तब जाकर शिवजी प्रसन्न हुए और कजरी तीज के दिन ही उन्होंने माँ पार्वती को स्वीकार कर लिया।

कजरी तीज व्रत विधि : 

  • यह व्रत सुहागन महिलायें भी रखती है और कुँवारी लड़कियाँ भी। इस दिन घर-घर में झूला डाला जाता है और सुहागनें इस पर बैठ कर झूलती है। वह झूला झूल कर अपने हर्ष और उल्लास को व्यक्त करती है।
  • इतना ही नहीं  सुहागन महिलायें एक जगह इकठ्ठा होती है। अपनी सहेलियों के साथ एक जगह एकत्रित होकर नाच गाना करती है और अपना पूरा समय मस्ती और गाने में बिताती है। कजरी तीज का व्रत बिना कजली गाये व्यर्थ माना गया है। इसलिए महिलायें इस दिन गीत गायन करती है। गांव में तो इस दिन लोग मजीरों और ढोल के साथ गीत गाते है। 
  • महिलायें और कुँवारी लड़कियाँ इस दिन व्रत रखती हैं, अपने जीवन साथी की लंबी आयु के लिए। इस दिन चना जौ गेंहू और चावल को मिलाकर सत्तू बनाया जाता है। फिर इस सब को घी और शक्कर में मिलकर कई तरह के पकवान बनाये जाते है।
  • रात में जब चंद्रमा आता है, तब इस व्रत को खोला जाता है । जो सत्तू के पकवान बनाये गए है, उसी से यह व्रत खोला जाता है.
इस दिन विशेष रूप से गौ माता की पूजा की जाती है। कहते है सात रोटियां बनाकर उस पर गुड़ और चने रखकर जब तक गाय को न खिला दिया जाये तब तक यह व्रत नही खोलना चाहिए।

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