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About Festivals

आज मानव बहुत व्यस्त है। जीविका कमाने में समय व्यतीत करना उसकी मजबूरी है। इस भाग दौड़ में वह भूल जाता है कि वह इंसान है, मशीन नहीं। उसे आराम चाहिये, मनोरंजन और बदलाव उसकी जरूरत है। ऐसे में नित नये त्योहार उसके लिये वरदान साबित होते हैं। त्योहार जीवन में सुखद परिवर्तन लाते हैं उसमें नई चेतना व स्फूर्ति का संचार करते हैं।

विज्ञान की उन्नति के साथ मानव चाँद पर जा पहुँचा है। त्योहार उसके बौद्धिक विकास के साथ साथ उसमें भावनात्मक विकास करते हैं। भारत के त्योहार करूणा, दया, आतिथ्य सत्कार, पारस्परिक प्रेम एवं सद्भावना तथा परोपकार जैसे नैतिक गुणों का विकास करने से सहायक होते हैं।

मानव जीवन अनेक विविधताओं से भरा हुआ है । अपने जीवनकाल में उसे अनेक प्रकार के कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है । इनमें वह प्राय: इतना अधिक व्यस्त हो जाता है कि अपनी व्यस्त जिंदगी से स्वयं के मनोरंजन आदि के लिए समय निकालना भी कठिन हो जाता है ।

इन परिस्थितियों में त्योहार उसके जीवन में सुखद परिवर्तन लाते हैं तथा उसमें हर्षोंल्लास व नवीनता का संचार करते हैं । त्योहार अथवा पर्व सामाजिक मान्यताओं, परंपराओं व पूर्व संस्कारों पर आधारित होते हैं । जिस प्रकार प्रत्येक समुदाय, जाति व धर्म की मान्यताएँ होती हैं उसी प्रकार इन त्योहारों को मनाने की विधियों में भिन्नता होती है ।

सभी त्योहारों की अपनी परंपरा होती है जिससे संबंधित जन-समुदाय इनमें एक साथ भाग लेता है । सभी जन त्योहार के आगमन से प्रसन्नचित्त होते हैं व विधि-विधान से, पूर्ण हर्षोल्लास के साथ इन त्योहारों में भाग लेते हैं । प्रत्येक त्योहार में अपनी विधि व परंपरा के साथ समाज, देश व राष्ट्र के लिए कोई न कोई विशेष संदेश निहित होता है ।

ये त्योहार मनुष्य के जीवन को हर्षोल्लास से भर देते हैं । इन त्योहारों से उसके जीवन की नीरसता समाप्त होती है तथा उसमें एक नवीनता व सरसता का संचार होता है । त्योहारों के आगमन से पूर्व ही मनुष्य की उत्कंठा व उत्साह उसमें एक सकारात्मक व सुखद परिवर्तन लाना प्रारंभ कर देते हैं । वह संपूर्ण आलस्य व नीरसता को त्याग कर पूरे उत्साह के साथ त्योहारों की तैयारी व प्रतीक्षा करता है ।

त्योहारों के शुभ अवसर पर निर्धन से निर्धन व्यक्ति भी नए वस्त्र धारण करते हैं एवं समस्त दुख-अवसादों को भुलाकर त्योहार की खुशियाँ मनाते हैं । त्योहारों के अवसर पर पंडितों, गरीबों तथा अन्य लोगों को दान आदि देकर संतुष्ट करने की प्रथा का भी समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है । भूखे को भोजन, निर्धनों को वस्त्र आदि बाँटकर लोग सामाजिक समरसता लाने का प्रयास करते हैं ।


भारत त्योहारों का देश है :

भारत त्योहारों का देश है। भारत में भिन्न भिन्न धर्म एवं जाति संप्रदाय के लोग निवास करते हैं। भारत के त्योहार इसकी संस्कृति की महानता को उजागर करते हैं।

भिन्न भिन्न जातियों, भाषाओें, प्रातों व भिन्न भिन्न सम्प्रदायों द्वारा एक साथ त्योहार मनाने से पारस्परिक सौहार्द एवं स्नेह की भावनायें पुनजींवित होती हैं। हमारे त्योहार अधिकतर ऋतु चक्र के अनुसार मनाये जाते हैं। सभी त्योहार जनमानस को खुशियाँ, उल्लास व उत्साह प्रदान करते हैं।

विजयादशमी का पर्व जिस प्रकार असत्य पर सत्य की तथा अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है उसी प्रकार रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम और भाई का बहन की आजीवन रक्षा करने के संकल्प को याद कराता है । ‘दीपावली’ में दीपों के साथ हमारे जीवन में भी नयी रोशनी जागृत होती है। इसी प्रकार रंगों का त्योहार होली हमें संदेश देता है कि हम आपसी कटुता व वैमनस्य को भुलाकर अपने शत्रुओं से भी प्रेम करें ।

मुस्लमान भाईयों की ईद, मुहर्रम, सिक्खों की बैसाखी, लोहड़ी, ईसाईयों का क्रिसमस सभी त्योहार समाज में नवीनता एवं खुशियाँ लाते हैं। मनुष्य के जीवन की नीरसता को दूर करते हैं और लोगों को दान दक्षिणा आदि सत्कर्म करने की प्रेरणा देते हैं।

ईसाइयों का त्योहार क्रिसमस संसार से पाप के अंधकार को दूर करने का संदेश देता है तो मुसलमानों की ईद भाईचारे का संदेश देती है । इस प्रकार सभी त्योहारों के पीछे समाजोत्थान का कोई न कोई महान उद्देश्य अवश्य ही निहित होता है । लोग एक-दूसरे के करीब आते हैं जिससे आपसी वैमनस्य घटता है । त्योहारों के अवसर पर दान देने, सत्कर्म करने की जो परंपरा है, उससे सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने में मदद मिलती है । स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गाँधी जयन्ती इत्यादि राष्ट्रीय त्योहार पूरे राष्ट्र में प्रतिवर्ष एक ही दिन हम सब मिलकर मनाते हैं जिससे राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत होती है एवं आपसी एकता भी मजबूत होती है।

ये त्योहार हमारी संस्कृति के गौरव हैं। हमारे ये त्योहार हमारी पहचान हैं। अतः हमें इन को मिल जुलकर पवित्रता व सहदयता से मनाना चाहिये।